बीसीसीआई एक बड़ी संस्था है जिसका अभिन्न अंग है बीसीए कोई दुकान नहीं:- कृष्णा पटेल

बीसीसीआई एक बड़ी संस्था है जिसका अभिन्न अंग है बीसीए कोई दुकान नहीं:- कृष्णा पटेल


पटना, आज दिनांक 7 अगस्त 2020 को बिहार क्रिकेट एसोसिएशन, मीडिया कमेटी के संयोजक कृष्णा पटेल ने आदित्य वर्मा द्वारा जारी बयान पर पलटवार करते हुए कहा की बीसीसीआई एक बड़ी संस्था है जिसका अभिन्न अंग है बीसीए कोई दुकान है नहीं।
कृष्णा पटेल ने कहा कि इन्होंने बीसीसीआई के समक्ष बीसीए की छवि को धूमिल करने के लिए जिस प्रकार से विभिन्न प्रकार के षडयंत्र रचने का काम किया और नाकाम रहे । 
जिसके कारण वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठें हैं और आज वे हताश व निराश इस कदर हो गए हैं कि बीसीसीआई जैसी एक बड़ी संस्था को हीं दुकान के नाम से संबोधित कर डालें।
क्योंकि बीसीए- बीसीसीआई का हीं एक अभिन्न अंग है।
इस बात से बीसीए - बीसीसीआई के सम्मानित अध्यक्ष सौरव गांगुली को अवगत कराएगी और
एक बड़ी संस्था को दुकान के नाम से संबोधित करना कहीं से उचित नहीं है।
 इसके लिए इनको माफी मांगनी चाहिए।
जिस प्रकार से उन्होंने कहा है कि सीएबी के बिना बीसीए अपना दुकान नहीं चला सकती।
जिससे इनकी मानसिकता स्पष्ट रूप से उजागर हो गई है की सीएबी एक खुली दुकान के रूप में अपना अस्तित्व तलाश रही है।

लेकिन बीसीए कोई दुकान नहीं बल्कि एक प्रतिष्ठित संस्था का अभिन्न अंग है। जो एक मजबूत परिवार के रूप में बिहार में संचालित हो रही थी,  है और अनवरत संचालित होते रहेगी ।
क्योंकि बीसीए के प्रतिष्ठित अध्यक्ष श्री राकेश कुमार तिवारी जी के नेतृत्व में उपाध्यक्ष दिलीप सिंह, कार्यकारी सचिव श्री कुमार अरविंद, ओजस्वी कोषाध्यक्ष श्री आशुतोष नंदन सिंह और जिला प्रतिनिधि संजय कुमार सिंह जी सहित सभी 38 जिला संघों के सम्मानित पदाधिकारीगण पूरी एकजुटता के साथ बिहार में क्रिकेट बहाल करने के लिए कृत संकल्पित और सक्षम  हैं।
इसमें किसी बिचौलिए को दखलअंदाजी देने की आवश्यकता नहीं है ।
हद तो तब हो गई जब इन्होंने बीसीए के कुछ पूर्व पदाधिकारियों को भी नहीं छोड़ा जो वर्तमान समय में इनके सहयोगी हैं। जिससे बीसीए को कोई लेना-देना नहीं।
उनके ऊपर भी तंज कसते हुए टुकड़े- टुकड़े गैंग के नाम से संबोधित कर उनका भद्दा मजाक उड़ाने का भी काम किया।
रही बात बीसीए को बीसीसीआई से मिलने वाली अनुदान राशि की तो मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जिस समय बीसीए को विनोद राय वाली कमेटी से जो अनुदान बीसीए को मिला था।
उस समय भी आपने बीसीए को अनुदान नहीं देने के लिए एड़ी -चोटी एक कर चुके थे।
फिर भी बीसीए को बीसीसीआई से अनुदान मिला।
जबकि उस समय बीसीए के पूर्व पदाधिकारियों के ऊपर कई संगीन आरोप भी लगे हुए थे।

लेकिन आज बीसीए के वर्तमान सभी पदाधिकारी व्यक्तित्व के धनी, प्रतिष्ठित व बेदाग हैं और उनकी छवि साफ-सुथरी है।
तो फिर बीसीसीआई से बीसीए को अनुदान क्यों नहीं मिलेगा ?
इसीलिए लोगों को डराना और दिग्भ्रमित करना बंद कीजिए इससे कुछ होने वाला नहीं है।
सत्य की जीत होती है और जीत होकर रहेगी।
सत्यमेव जयते।।
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